Monday, December 4, 2017

आपके जीवन के लिए बेहद उपयोगी है यह लेख अगर आपने इसे समझ लिया तो आप अपने बीमारियों के कारणों को आसानी से जान पाएंगे और उनका इलाज वक्त रहते करवा सकेंगे

आपके जीवन के लिए बेहद उपयोगी है यह लेख अगर आपने इसे समझ लिया तो आप अपने बीमारियों के कारणों को आसानी से जान पाएंगे और उनका इलाज वक्त रहते करवा सकेंगे | 

 सन 2007 में डाक्टर हिरेन पटेल को 24 घंटे हमेशा थोडा-थोडा बुखार (fever) रहता था , जो कि थर्मामीटर (thermometer) में नहीं आता था लेकिन इससे उनका वजन कम होने लगा। उन्होंने भारत के अनेक बड़े-बड़े डाक्टरों (doctors) को दिखाया और टेस्ट कराया लेकिन उनकी इस वीमारी को कोई डाक्टर पकड़ (Diagnose) नहीं पाया , कोई डाक्टर लीवर कैंसर (liver cancer) तो कोई ल्यूकोमा तो कोई HIV+ आदि-आदि की शंका व्यक्त करते थे । लिहाजा उनकी रातों की नींद गायब हो गयी। अंत में ईश्वर (ishwar) की शरण में गए जहाँ उन्हें आभास हुआ कि आप अमृत का सेवन कीजिये । अब अमृत मिले कहाँ से ? तो उन्होंने अनेक वैदिक ग्रंथों को पढ़ा और उन्हें वहां ” अमृत” का तात्पर्य समझ में आया ।

● अमृत दो शब्दों से बना है । आम + रीत ,
आम = सामान्य , रीत = तरीका (practice)
यानि पानी पीने का सही तरीका (Travelent Practice of Drinking Water ) भारत में एक कमी है कि हमारे ऋषियों ने जिन तरीको को प्रमाणित करके सिद्द कर रखा है भारत में उस पर खोज (research) नहीं करते, जबकि विदेशों में हर दवाइयों पर Documentation है । हमारे यहाँ माउथ ऑफ़ डॉक्यूमेंटेशन (mouth of documentation) है इस कारण शब्द का मूल अर्थ विलुप्त हो जाता है ।
– यदि शरीर को समझना है तो ब्रह्माण्ड (universe) को समझना जरुरी है , पृथ्वी पर 73% जल है उसी प्रकार हमारे शरीर में भी 73% जल है। यदि हमारी सारी हड्डियों व मांसपेशियों (bones and muscles) को निचोड़ा जाए तो 27% स्थूल है ।
● हम जो भी खाते-पीते है वह पानी के माध्यम से शरीर में जाता है पानी का प्रारूप शरीर में रक्त (blood in the body) है।
पानी रक्त में घुलकर शरीर के अंगों को पोषकता प्रदान करता है । हम जो पानी पीते है उसका रासायनिक विघटन (chemical reaction) होता है। जैसे हाइड्रोजन (hydrogen) व आक्सीजन (oxygen)। शरीर में जो इलेक्ट्रोमैग्नेटिक (electromagnetic) होता है वह साँस से होता है, जिसे प्राणवायु (Oxygen) कहते है ।
● यह शरीर हमें अपने माँ-बाप (mother and father) से मिला है , इसीलिए हमारा डीएनए (DNA) हमारे माँ-वाप से , पूर्वजों से मिलता है, एक अणु से हमारा शरीर कैसे बना ?
यदि हमारे डीएनए में विकृति होगी तो हमें जन्मजात रोग पैदा (infections from birth time) होते ही शुरू हो जायेंगे।
● हमारे शरीर में तीन रचना है
1. ओक्सीजन (oxygen) को फैलाना
2. भोजन करना व पचाना (digest)
3. विजातीय तत्व (Wastage) को बाहर करना ।
● हमारे शरीर में दो तरह का wastage है ।
1. Water Soluble
2. Non water Soluble जिसे लीवर प्रोसेस (liver process) करके बाहर निकालता है, तथा किडनी (kidney) मूत्र के द्वारा प्रोसेस (process) करके शरीर से बाहर निकालती है । अब जरा सोचें ! जो शरीर हमें हमारे माँ-बाप से मिला है उसे क्यूँ Soluble Processing की आदत होगी ?
● हमारे शरीर को Soluble Process करने का तरीका हमारे DNA में हमारे माँ-बाप से मिला । तो क्या हमारे माँ-बाप कोल्ड ड्रिंक्स (cold drinks) पीते थे ? यूरिया , रासायनिक खाद खाते थे ? डाई लगाते थे ? चाय-काफी (tea- coffee) पीते थे ? जंक फूड (junk food) खाते थे ? नहीं ना ! तो फिर आपके लीवर व किडनी को क्यूँ उन चीजों को प्रोसेस करने की आदत होनी चाहिए । हो सकता है हमारी आने वाली पीड़ी इन्हें प्रोसेस कर पायें लेकिन अभी से कुछ कहना मुश्किल है ।
● हमारी 90 % विमारियां हमारे शरीर से Wastage ना निकलने के कारण होती है। हमारा मैनेजमेंट सिस्टम ऑफ़ वेस्टेज प्रोसेस (management system of wastage process) को बिगाड़ा किसने ? खुद हमने
● आज मेडिकल साइंस (medical science) मानवता से दूर होता जा रहा है इनका उद्देश्य सिर्फ पैसे कमाना है , जिस चीज की कीमत 1000 रुपये है यह फर्मासिस्टकल कम्पनियाँ (pharma companies) उसे अस्पताल को 20 हजार में बेचती है और वह अस्पताल उसी सामान के 1.5 से 2 लाख रूपये आपसे वसूलती है कितना अधिक प्रॉफिट मार्जिन है (see how much profit margin) ? ? ये फर्मासिस्टूकल कम्पनियाँ डाक्टरों को मोटे-मोटे गिफ्ट और विदेशी दौरों (foreign tours and costly gifts) का पूरा खर्च खुद उठाती है।
● हमारे शरीर में 73% पानी है और सारे ओर्गन्स (organs) पानी में तैरते स्पांज (sponge) जैसे है यदि स्पांज से पानी निकाल दें तो वह सूख जायेगा, निष्क्रिय हो जायेगा और काम करना बंद कर देगा । हमारे शरीर में जब भी पानी की कमी होती है तो शरीर सबसे पहले ब्रेन व हार्ट (brain and heart) को बचाने का प्रयास करता है । शरीर ब्रेन व हार्ट को पानी की कमी नहीं होने देगा उसके लिए वह दूसरे अंगों से पानी को अवशोषित करके ब्रेन व हार्ट को देगा , अब मान लीजिये आपके शरीर में पानी की कमी हो गयी तो शरीर ने आपके पेनक्रियाज (pancreas) से पानी खींच लिया और हार्ट को दे दिया तो क्या होगा ? आपका पेनक्रियाज सूख जायेगा यदि यही क्रिया निरंतर चलती रही तो धीरे-धीरे पेनक्रियाज काम करना बंद कर देगा और काम बंद करते ही इन्सुलिन (insulin) बनना बंद हो जायेगा और आपको डायबटीज (diabetes) हो जायेगा। शरीर के अन्दर जब भी पानी की कमी होती है शरीर Defective होना शुरू हो जाता है । ब्रेन व हार्ट का पानी सबसे अंत में सूखता है ।

● शरीर में जब पानी की कमी हो जाती है तो शरीर का wastage नहीं निकलता है वह धीरे-धीरे शरीर में जमा (collect) होने लगता है, फिर वह अल्सर (ulcer) का रूप लेता है , फिर टयुमर (tumor) , फिर कैंसर (cancer) का रूप ले लेता है । यानि ” कैंसर का मूल ” शरीर से wastage का ना निकलना है।
● डा. फरीदुल बेटमिन गिलीज एक इजराइली वैज्ञानिक थे , जिन्हें नोबल पुस्कार (nobel prize) के लिए चुना गया लेकिन इन फर्मास्विटिकल कंपनियों ने षड्यंत्र करके उन्हें रोक दिया । स्पस्टवादी विचारधारा होने के कारण एक बार उन्होंने कुछ बोल दिया होगा तो इजराइल की सरकार ने उन्हें जेल (Israel govt. put him in jail) में डाल दिया जहाँ उन्होंने 3000 मरीजों को तीन साल में ठीक किया और वहां पर वाटर थिरेपी (water therapy) के ऊपर एक किताब लिखी ” Your Body Many Crises ” यह दुनिया के अनेक देशों में प्रतिबंधित (banned) है। भारत में भी प्रतिबंधित है यदि आपके कोई रिश्तेदार विदेश में रहते है तो आप उनसे यह किताब मंगवाकर पढ़िए। इन्होने अनेक विमारियों को एनालाइज (analyze) करके लिखा है ।
● हमारे शरीर में 90% विमारी पानी की कमी (lack of water) के कारण होता है । शरीर के सारे विजातीय तत्व पानी पीने से निकल जाते है। ज्यादा पानी पीने से भी शरीर में सूजन (swelling) हो जाती है आइये कुछ विमारियों के द्वारा आपको वाटर थिरेपी के विषय में समझाने का प्रयास करते है ।
● ईश्वर ने शरीर से wastage निकलने के लिए मल-मूत्र-पसीना (स्वेद), छींक , पाद आदि प्रारूप दिए हैं ।
● अस्थमा :- अस्थमा में आदमी साँस नहीं ले पाता है डाक्टर से पूंछो तो कहेंगे कि कैप्लरी में ब्लोकेज है, लेकिन जब पूंछो कि अस्थमा होता क्यों है ? तो डाक्टर कहेंगे श्वांस नलिका में सूजन (swelling in nose) के कारण , या इन्फेशन के कारण ? अब प्रश्न (question) उठता है कि फिर सबकी श्वांस नलिका में सूजन क्यों नहीं होता है ?
जब फेफड़ा (lungs) पम्प करता है तो उसे पानी की ज्यादा जरुरत होती है लेकिन शरीर में पानी की कमी है तब ? शरीर फेफड़े का पानी खींचकर हार्ट व ब्रेन को बचाएगा उस समय फेफड़ों में पानी की कमी के कारण कैप्लरी में ” स्टामिन ” बनेगा अर्थात सूजन होगा । स्टामिन मनुष्य का दुश्मन (enemy) नहीं है , शरीर स्टामिन बनाती है तो उसका कारण है। मान लीजिये शरीर में पानी की कमी हो जाये तो फेफड़ा सारा पानी खींच लेगा तो उस स्थति में हार्ट व ब्रेन को पानी नहीं मिलेगा लिहाजा हार्ट व ब्रेन ख़राब (damage) हो जायेगा ।
1% दवाइयां स्टामिन मैनेजमेंट सिस्टम की है। जब डाक्टर स्प्रे व नोसल ड्राप (spray and nasal drop) देते है तो जरा सोचिये वह क्या करता है ? ? वह force fully स्टामिन के ब्लोकेज को खोलने का प्रयास करेगा अब ऐसी स्थति में जब शरीर में पानी की कमी है तो फेफड़ा और सूख जाएगा अतः आपकी दवाओं का डोस बढ़ा दिया जायेगा और एक समय बाद डाक्टर कहेगा आपको दवाइयां असर नहीं कर रही है लिहाजा आपको आर्टिफिशयल कैप्लरी सर्जरी (artificial cavalry surgery) के द्वारा लगवानी पड़ेगी। यह समस्या फिर आएगी तब डाक्टर कहेगा इन्हें घर ले जाइये अब इन्हें दुवाओं की जरुरत है। यानि हम अपने पैरों पर खुद कुल्हाड़ी (axe in own legs) मार रहे है ।
● ब्लड -प्रेशर :- एक व्यक्ति जब तक मरता है तब तक 2.5 लाख की ब्लड-प्रेशर की दवाइयां खा लेता है। याद रखें ” जो दवाई आपको पूरी जिन्दगी लेनी पड़े वह दवाई नहीं बल्कि आपके भोजन का हिस्सा है ” (part of a food)। ब्लड-प्रेशर का मुख्य कारण “हाइपर टेंशन” है हाइपर टेंशन (hyper tension) यानि क्या ? यानि आपका दिमाग हमेशा गर्म रहेगा । वह Electromagnetic Wave निकालता है तो ब्रेन में सेंसेसन चक-चक-चक करता रहता है। यदि Electromagnetic Wave बढ़ जाता है तो दिमाग गर्म हो जायेगा तब उसे पानी की ज्यादा जरुरत पड़ेगी । ऐसी स्थति में शरीर को तो ब्रेन को बचाना है इस कारण शरीर तेजी से ब्रेन को पानी पहुँचाने की कोशिश करेगा वही स्पीड बढ़ते ही हाई-ब्लड-प्रेशर (high blood pressure) शुरू हो जायेगा। यदि दिमाग ठंडा होगा तो उसे पानी की जरुरत नहीं होगी , यदि दिमाग को पानी की जरुरत नहीं होगी तो ब्लड-प्रेशर नहीं बढेगा ।
● ब्लड-प्रेशर के रोगी नहाने के पहले 150 ml पानी को पियें , भोजन के पहले व भोजन के बाद पेशाब (toilet) करें । इससे धीरे-धीरे BP सामान्य हो जायेगा।
● डाइबटीज ( शुगर ) :- हमारे शरीर में एक अंग है पेनक्रियाज जो इन्सुलिन बनाता है जो कि हमारे रक्त के अन्दर मौजूद ब्लड-शुगर को use करता है शरीर में जब ग्लूकोस (glucose) पचता नहीं है तो शुगर बढ़ जाता है ग्लूकोस , इन्सुलिन ना बनने के कारण पचता नहीं है और इन्सुलिन जब शरीर में पानी की कमी हो जाती है तो शरीर पेनक्रियाज से पानी खींचकर हार्ट व ब्रेन को बचाता है ऐसा बार-बार होने पर पेनक्रियाज निष्क्रिय (dead) हो जाता है और इन्सुलिन नहीं बनाता है , लिहाजा ब्लड के अन्दर शुगर की मात्रा बढ़ जाती है और हमें शुगर (sugar disease) हो जाता है । फिर हम बाहर से आर्टिफिशियल इन्सुलिन की गोली लेते है , इससे ब्लड-शुगर अवशोषित होगा तब फिर हमें पानी की जरूरत पड़ेगी और शरीर में पानी की कमी के कारण पेनक्रियाज में स्टामिन बनेगा यानि सूजन आएगी फिर हम इन्सुलिन की गोली व गोली से इंजेक्शन की तरफ जायेंगे। शुरुआत गोली से करते हैं और ख़त्म हाई डोस इंजेक्शन (high dose injection) पर करते है ।
इसी पानी की चिकित्सा से थर्ड स्टेज कैंसर (third stage cancer) और पैरालिसिस (paralysis) भी ठीक हुआ है ।

आइये अब हम पानी पीने के तरीकों की बात करते है ।

● सुबह उठते ही सवा लीटर पानी पीजिये क्योकि हमारे आमाशय की कैपिसिटी 600 मिली है यदि इसको जबरदस्ती फैलाया जाए तो लगभग तीन लीटर पानी आ सकता है अब आप 600 ml का दूना कर लीजिये यानि सवा लीटर पानी विना कुल्ला (drink without gargle) किये बैठकर पीजिये । जब आप पानी पियेंगे तो आमाशय से हवा निकलेगी और पानी को forcefully यूरिन ट्रैप से किडनी द्वारा या डाइजेस्टिव ट्रैप (digestive trap) से पानी निकाला जायेगा इस कारण सारा कचरा मल व पेशाब के रास्ते साफ हो जायेगा सारे विजातीय तत्व बाहर निकल जायेंगें । जब wastage निकल जायेगा तो आपको विमारियां नहीं होंगी । (safe from diseases)
-● हमारे शरीर में कोलन (colon) है आँतों के पीछे का हिस्सा जिसमे हेपेटाइटस -H जो कि शरीर के बचे निष्क्रिय कोशिकाओं को पेशाब व मल के द्वारा बाहर निकाल देता है। इसका कार्य पुरुष में वीर्य व औरतों में अंडे बनाने का कार्य करता है ।
● 15 वर्ष से ऊपर के सभी बच्चे 600 ml से ज्यादा पानी पी सकते है । जिन्हें आदत नहीं है वो 100 ml प्रति सप्ताह बढ़ाते (increase every weak) जाएँ दो-तीन माह में वो भी सवा लीटर पानी आसानी से पी (easily drink) सकते है । पानी पीने के एक घंटे पहले व बाद में कुछ भी ना खाएं ना-पीये , अन्यथा वह पाचन में जायेगा जबकि आपने पानी पिया है wastage को निकालने के लिए ।
● भोजन के एक घंटे बाद ही जल का सेवन करें । drink after 1 hr. of food
● जिन्हें गैस या एसिडिटी (gas or acidity) है वह भोजन के आधे घंटे पहले 150 ml पानी पियें ।
● जो सोने से पहले 150 ml पानी पीकर सोते है उन्हें हार्ट व लकवा की शिकायत (no problem of heart) जल्द नहीं होती है ।
● ध्यान दें :- मोटापा (obesity) , कफ प्रवृति , जोड़ों के दर्द (joint pain), न्योरिजिकल डिसीज जैसे लकवा , लाइजमर, पार्किसेन्स, वाले ही सुबह गर्म पानी पियें (drink warm water) बाकि सारे लोग सामान्य पानी पियें (rest use normal water)।
● पानी ना पियें :- जिन्हें पानी पीने के बाद हाथ-पैरों व चहरे पर सूजन आती हो , नाक से पानी गिरता हो, छींक आती हो, चक्कर आते हों , किडनी की समस्या (kidney problem) हो वो लोग सुबह का पानी ना पियें ।
● गर्भवती महिलाएं (pregnant ladies) को 500 ml से कम पानी ( room temp. के बराबर ) पीना चाहिए ।

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