बड़ी कामयाबी, 18 घंटे तक चली सर्जरी और बदल दिया मानव सिर
मानव सिर पर प्रत्यारोण करने की कोशिशों के बारे में तो आपने कई खबरें पढ़ी होंगी लेकिन अब डॉक्टरों को इसे हकीकत में बदलने में कामयाबी मिल गई है
नई दिल्ली : मानव सिर पर प्रत्यारोण करने की कोशिशों के बारे में तो आपने कई खबरें पढ़ी होंगी लेकिन अब डॉक्टरों को इसे हकीकत में बदलने में कामयाबी मिल गई है. पिछले दिनों सिर के प्रत्यारोपण के लिए बंदर पर भी प्रयोग किया गया था. यह पहला मौका है जब पूरी दुनिया में किसी मनुष्य का सिर प्रत्यारोपित किया गया है. इसे चिकित्सा विज्ञान की बड़ी कामयाबी माना जा रहा है. आपको बता दें कि इस सर्जरी को इटली के न्यूरोसर्जन सर्जिओ कैनेवरो और उनकी टीम ने सफलता पूर्वक पूरा किया है. उन्होंने चीन में एक शव की सर्जरी की, जो 18 घंटे तक चली.
मानव मस्तिष्क की सर्जरी को लेकर डॉक्टर सर्जियो का दावा है कि ऑपरेशन सफल रहा है. इस सर्जरी का सीधा प्रसारण किया गया. उन्होंने बताया कि ऑपरेशन में चिकित्सकों के समूह ने साबित किया कि मानव रीढ़, तंत्रिकाओं और रक्त वाहिकाओं को दोबारा जोड़ना संभव है.' डॉक्टर कैनेवरो ने इस परीक्षण की सफलता के दावे का कोई पक्का सबूत नहीं दिया है. उन्होंने ये भरोसा जरूर दिया कि वे कुछ दिन बाद परीक्षण से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध करा देंगे.
डॉक्टर सर्जियो दिसंबर में जीवित इंसान का हेड ट्रांसप्लांट करने की तैयारी में लग गए हैं. टूरिन एडवांस्ड न्यूरोमाडुलेशन ग्रुप के निदेशक और इटली के प्रोफेसर कैनेवरो ने बताया कि हार्बिन मेडिकल यूनिवर्सिटी के दर्जनों डॉक्टर्स के दल ने इस प्रक्रिया को अंजाम दिया है. उन्होंने कहा, अगले चरण में ब्रेन डेड व्यक्ति के दान किए अंगों से ट्रांसप्लांट किया जाएगा. यह हेड ट्रांसप्लांट का अंतिम चरण होगा. उम्मीद है कि ऑपरेशन सफल होगा और इस चिकित्सा पद्धति को मंजूरी मिल सकेगी.
गौरतलब है कि इससे पहले जनवरी में चीन में ही डॉक्टर कैनेवरो की टीम ने बंदर के सिर का सफल ट्रांसप्लांट किया था. उस समय बंदर 20 घंटे तक जीवित रहा था. डॉ. कैनेवरो ने तब कहा था, 'मैं मानव हेड ट्रांसप्लांट करना चाहता हूं. ये सफलता बड़ी है. हम पैरालिसिस पर कंट्रोल पाने में सक्षम हो जाएंगे.' 1970 में रॉबर्ट जे व्हाइट ने भी एक बंदर पर परीक्षण किया था. उस समय वो ऑपरेशन सफल नहीं हो सका था.
उन्होंने कहा कि सभी यही कहते हैं कि हेड ट्रांसप्लांट असंभव है, किंतु यह ऑपरेशन सफल रहा है. जीवित इंसान के रूप में रूस के 31 वर्षीय कंप्यूटर साइंटिस्ट वलेरी स्पिरिडोनोव की हेड ट्रांसप्लांट सर्जरी होगी. वे मांसपेशी क्षतिग्रस्त होने के असाध्य रोग से पीड़ित हैं और उन्होंने खुद पर परीक्षण किए जाने के लिए सहमति दी है. डॉक्टर कैनेवरो द्वारा इस सर्जरी की सफलता के दावे से इंसान के हेड ट्रांसप्लांट के सफल होने की उम्मीदों को और बल मिल गया है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि परीक्षण सफल रहा तो लकवे के शिकार लोगों के ठीक होने की उम्मीदें बढ़ जाएंगी.

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